“राम राम” दो बार ही क्यों कहा जाता है?
क्या आपने कभी सोचा है कि बहुत से लोग जब आपस में मिलते हैं तो एक-दूसरे को दो बार ही “राम राम” क्यों कहते हैं?
एक बार या तीन बार क्यों नहीं?
इसके पीछे एक बहुत गूढ़ और आध्यात्मिक रहस्य छुपा हुआ है, जो आदि काल से चला आ रहा है।
🔹 अक्षरों का रहस्य
हिंदी वर्णमाला में —
- ‘र’ = 27वाँ अक्षर
- ‘आ’ की मात्रा = 2
- ‘म’ = 25वाँ अक्षर
अब इनका योग करें —
27 + 2 + 25 = 54
अर्थात एक “राम” का योग = 54
अब जब हम दो बार “राम राम” कहते हैं —
54 + 54 = 108
🔹 108 का महत्व
हम जब भी कोई मंत्र-जप करते हैं, तो 108 मनकों की माला से ही जप किया जाता है।
इस प्रकार केवल “राम राम” कह देने से ही पूरी माला का जप पूर्ण हो जाता है।
🔹 राम शब्द के अर्थ
“राम” शब्द के अर्थ उसकी पुनरावृत्ति से भी बदल जाते हैं —
- राम! → पुकार
- राम राम! → अभिवादन
- राम, राम, राम! → तरस / घृणा
- राम, राम, राम, राम! → जप
अब ज़रा सोचिए —
इस पोस्ट को पढ़ते-पढ़ते आप अनजाने में ही कई बार “राम” बोल चुके होंगे।
👉 अगर आप गिनती करेंगे तो पाएँगे —
आपने कम से कम 20 बार “राम” का स्मरण कर लिया है।
✨ !! जय सिया राम जी !! ✨
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