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गुरुवार, 4 जनवरी 2018

कुंडली में विदेश यात्रा के योग – सम्पूर्ण ज्योतिषीय विवेचन



कुंडली में विदेश यात्रा के योग – सम्पूर्ण ज्योतिषीय विवेचन

एक समय ऐसा था जब घर से दूर रहकर काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। विदेश में काम करना या रहना दुःख और समस्या के रूप में देखा जाता था।
लेकिन वर्तमान समय में यह दृष्टिकोण पूरी तरह बदल चुका है। आज विदेश यात्रा और विदेश में कार्य करना एक सुनहरा अवसर माना जाता है।

आज अधिकांश लोग विदेश से जुड़कर काम करना चाहते हैं, कुछ लोग आनंद या नए अनुभव के लिए विदेश यात्रा करना चाहते हैं। हम में से लगभग हर व्यक्ति की यह इच्छा रहती है कि जीवन में कम से कम एक बार विदेश अवश्य जाए।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जन्म कुंडली देखकर यह स्पष्ट रूप से जाना जा सकता है कि किसी जातक के जीवन में विदेश यात्रा या विदेश में रहने का योग है या नहीं?


विदेश यात्रा से जुड़े मुख्य भाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में निम्न भाव विदेश यात्रा से संबंधित होते हैं—

  • अष्टम भाव – जल यात्रा, समुद्र यात्रा
  • द्वादश भाव – विदेश यात्रा, अनजान स्थान
  • सप्तम भाव – व्यावसायिक यात्रा
  • नवम भाव – लंबी यात्रा, धार्मिक यात्रा
  • तृतीय भाव – छोटी यात्रा

इन भावों की स्थिति, स्वामी ग्रह और दशा-अंतरदशा से विदेश योग का निर्धारण किया जाता है।


विदेश यात्रा के कारक ग्रह व दिशाएँ

दिशा – ग्रह

  • पूर्व – सूर्य
  • पश्चिम – शनि
  • उत्तर – बुध
  • दक्षिण – मंगल
  • ईशान – गुरु
  • अग्नि – शुक्र
  • वायव्य – चंद्र
  • नैऋत्य – राहु / केतु

मुख्य ग्रह

  • चंद्र – समुद्र यात्रा
  • गुरु – हवाई यात्रा
  • शनि – विदेश गमन
  • राहु – विदेश प्रवास

कुंडली में विदेश यात्रा के प्रमुख योग

  1. चंद्रमा बारहवें भाव में हो
  2. चंद्रमा छठे भाव में हो
  3. चंद्रमा दशम भाव में या दशम पर दृष्टि
  4. चंद्रमा सप्तम या लग्न में हो
  5. शनि-चंद्र योग
  6. दशमेश ↔ द्वादशेश परिवर्तन
  7. भाग्येश ↔ द्वादशेश परिवर्तन
  8. लग्नेश ↔ द्वादशेश परिवर्तन
  9. भाग्य स्थान में राहु
  10. सप्तमेश ↔ द्वादशेश परिवर्तन
  11. मंगल का चतुर्थ भाव से संबंध (स्थायी निवास नहीं)
  12. नवम-तृतीय-द्वादश भाव संबंध
  13. द्वादश भाव में राहु
  14. चतुर्थ भाव पापकर्तरी में
  15. भाग्येश + सप्तमेश सप्तम में
  16. सप्तमेश + शुभ ग्रह लग्न में
  17. द्वादशेश + सप्तमेश परिवर्तन (विवाह से विदेश)
  18. भाग्येश द्वादश में (धार्मिक यात्रा)
  19. पंचमेश का द्वादश/नवम से संबंध (स्टडी विदेश)
  20. चर राशि में अधिक ग्रह
  21. तत्व के अनुसार यात्रा
  22. केतु सूर्य से 6/8/12 में

विशेष ध्यान रखने योग्य बातें

  • चंद्र का बलवान होना आवश्यक
  • लग्न व लग्नेश कमजोर → विदेश योग प्रबल
  • चतुर्थ भाव कमजोर हो
  • शनि ढैय्या / साढ़ेसाती में भी विदेश योग
  • राहु, केतु, चंद्र दशा में विदेश योग अधिक

विदेश यात्रा क्या मानी जाएगी?

केवल घूमकर लौट आना विदेश यात्रा नहीं कहलाता।
विदेश में रहकर आजीविका कमाना या दीर्घ प्रवास ही वास्तविक विदेश यात्रा मानी जाती है।


विदेश प्रवास की अवधि निर्धारण

  1. तृतीय प्रवास – नजदीकी स्थान
  2. सप्तम प्रवास – जीवनसाथी संग
  3. नवम प्रवास – दूरस्थ क्षेत्र
  4. द्वादश प्रवास – विदेश
  5. पंचम-नवम – उच्च शिक्षा
  6. पाप ग्रह – हानि
  7. लग्नेश-अष्टमेश – दुर्घटना योग
  8. नवमेश पंचम – संतान द्वारा यात्रा
  9. गुरु प्रभाव – तीर्थ यात्रा
  10. वायु तत्व – हवाई यात्रा
  11. जल तत्व – समुद्री यात्रा
  12. अग्नि तत्व – सड़क यात्रा

निष्कर्ष

यदि कुंडली में व्यय स्थान में शनि, राहु या नैपच्यून हों—
तो विदेश यात्रा निश्चित मानी जाती है।

शुभम भवतु | कल्याण हो |


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