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बुधवार, 10 जनवरी 2018

ब्राह्मण कौन है



ब्राह्मण को जानना चाहता है?

मैं तुझे बताता हूँ कि ब्राह्मण कौन है।

ब्राह्मण वह है—

ब्राह्मण वह है, जो वशिष्ठ के रूप में केवल अपना एक दंड भूमि में गाड़ देता है और विश्वामित्र के समस्त अस्त्र-शस्त्र निष्फल हो जाते हैं। तब विश्वामित्र कहते हैं—
धिक् बलं क्षत्रिय बलं, ब्रह्म तेजो बलं बलं।
एकेन ब्रह्म दण्डेन, सर्वास्त्राणि हतानि में।

(क्षत्रिय का बल धिक्कार योग्य है, ब्राह्मण का तेज ही सच्चा बल है।)


ब्राह्मण वह है, जो परशुराम के रूप में 21 बार आततायी राजाओं का संहार करता है। जिनके विषय में कहा गया—
अग्रतः चतुरो वेदाः, पृष्ठतः सशरं धनुः।
इदं ब्राह्मं इदं क्षात्रं, शापादपि शरादपि॥

जहाँ ब्रह्मतेज और क्षात्रतेज दोनों एक साथ विद्यमान हैं।


ब्राह्मण वह है, जो दधीचि बनकर अपनी अस्थियों से वज्र बनवाता है और लोककल्याण के लिए अपने प्राण अर्पित कर देता है।
कर्तव्य को ही वरदान मान लेता है।


ब्राह्मण वह है, जो चाणक्य बनकर अपमान का प्रतिशोध नहीं, बल्कि राज्य व्यवस्था का विनाश कर इतिहास रचता है।
अर्थशास्त्र जैसा अद्वितीय ग्रंथ देता है।


ब्राह्मण वह है, जो मण्डन मिश्र के रूप में जन्म लेता है—
जिसके घर के द्वार पर तोते भी वेदांत पर शास्त्रार्थ करते हैं।


ब्राह्मण वह है, जो आदि शंकराचार्य बनकर 32 वर्ष की आयु में
अद्वैत वेदांत स्थापित कर देता है।


ब्राह्मण वह है, जो पाणिनि बनकर भाषा को व्याकरण देता है—
अष्टाध्यायी, जो आज भी अमर है।


ब्राह्मण वह है, जो पतंजलि बनकर महाभाष्य लिखता है और योग का विज्ञान देता है।


ब्राह्मण वह है, जो तुलसीदास बनकर रामचरितमानस लिख देता है—
जो जन-जन की गीता बन जाती है।


ब्राह्मण वह है, जो नारायण बनकर महाराणा प्रताप और शक्ति सिंह के बीच स्वयं बलिदान दे देता है—
राजवंश की रक्षा के लिए।


ब्राह्मण वह है, जो श्याम नारायण पांडेय, निराला, सुमित्रानंदन पंत,
रामधारी सिंह दिनकर, अटल बिहारी वाजपेयी बनकर
राष्ट्र की आत्मा को शब्द देता है।


ब्राह्मण वह है, जो सुदामा बनकर भगवान की आँखों से आँसू निकलवा देता है—
श्रद्धा के बल पर।


ब्राह्मण वह है, जो स्वामी रामभद्राचार्य बनकर बिना नेत्रों के भी
ज्ञान का प्रकाश फैला देता है।


ब्राह्मण वह है, जो मंगल पांडेय बनकर पहली गोली चला देता है।
जो बंकिमचंद्र बनकर वंदे मातरम् लिख देता है।
जो बाजीराव पेशवा बनकर 41 युद्ध जीत लेता है।


ब्राह्मण वह है, जो वाल्मीकि, तिलक, झांसी की रानी बनकर
इतिहास की धारा मोड़ देता है।


निष्कर्ष

ब्राह्मण कोई जाति नहीं—
ब्राह्मण चेतना है, त्याग है, तप है, सत्य है, साहस है, राष्ट्र है।

जिसमें ज्ञान भी है, शौर्य भी है।
जिसमें शब्द भी हैं, शस्त्र भी।


📿 अधिक जानकारी हेतु

दोष निवारण, पूजा-विधि, मंत्र और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए संपर्क करें—

आध्यात्मिक मार्गदर्शन: Dr. Bhargu Astrologer📞 Contact / WhatsApp: 9920255211

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