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बुधवार, 10 जनवरी 2018

कर्म - भोग



कर्म – भोग

आध्यात्मिक मार्गदर्शन: Dr. Bhargu Astrologer📞 Contact / WhatsApp: 9920255211

पूर्व जन्मों के कर्मों के अनुसार ही हमें इस जन्म में
माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका, मित्र-शत्रु और सगे-सम्बन्धी मिलते हैं।
क्योंकि इन सभी के साथ हमारा कोई न कोई कर्मिक लेन-देन होता है।
किसी से हमें कुछ लेना होता है और किसी को कुछ चुकाना होता है।


संतान के रूप में कौन आता है?

शास्त्रों के अनुसार संतान के रूप में भी हमारा कोई पूर्व जन्म का सम्बन्धी ही जन्म लेता है।
इसे चार प्रकारों में बताया गया है—

1. ऋणानुबन्ध पुत्र / पुत्री

पूर्व जन्म में यदि आपने किसी का ऋण लिया हो या किसी प्रकार से उसका धन या अधिकार छीना हो,
तो वही जीव आपके घर में संतान बनकर जन्म लेता है।
ऐसी संतान के कारण धन बीमारी, व्यर्थ कार्यों या परेशानियों में तब तक नष्ट होता रहता है,
जब तक उसका हिसाब पूरा नहीं हो जाता।


2. शत्रु पुत्र / पुत्री

पूर्व जन्म का कोई शत्रु बदला लेने के लिए संतान के रूप में जन्म लेता है।
ऐसी संतान बड़े होकर माता-पिता से झगड़ा करती है,
अपमान करती है और जीवन भर उन्हें मानसिक कष्ट देती रहती है।


3. उदासीन पुत्र / पुत्री

इस प्रकार की संतान न माता-पिता की सेवा करती है और न ही सुख देती है।
विवाह के बाद अक्सर अलग हो जाती है और माता-पिता को उनके हाल पर छोड़ देती है।


4. सेवक पुत्र / पुत्री

यदि आपने पूर्व जन्म में किसी की निःस्वार्थ सेवा की हो,
तो वही जीव आपकी सेवा का ऋण चुकाने के लिए
आपका पुत्र या पुत्री बनकर जन्म लेता है।
ऐसी संतान बुढ़ापे में माता-पिता का सहारा बनती है।

जो बोया है, वही काटना पड़ता है।
अपने माता-पिता की सेवा की है, तभी आपकी संतान भी आपकी सेवा करेगी।


महत्वपूर्ण सत्य

यह नियम केवल मनुष्य पर ही नहीं, सभी जीवों पर लागू होता है।
यदि आपने किसी गाय या पशु की निःस्वार्थ सेवा की है,
तो वह भी आपके घर संतान के रूप में जन्म ले सकता है।
और यदि किसी निरपराध जीव को कष्ट दिया है,
तो वही जीव जीवन में किसी न किसी रूप में कष्ट बनकर लौटता है।


प्रकृति का नियम

प्रकृति कभी अन्याय नहीं करती—

  • किसी को एक रुपया दिया → सौ गुना होकर लौटेगा
  • किसी से एक रुपया छीना → सौ गुना कटेगा

यह इस जन्म में हो या अगले जन्म में,
हिसाब पूरा होकर ही रहता है।


विचार करने योग्य प्रश्न

आप कौन-सा धन साथ लेकर आए थे?
और कितना धन साथ लेकर जाओगे?

जो लोग संसार छोड़ गए,
वे कितना सोना-चाँदी अपने साथ ले गए?

जो धन मृत्यु के बाद बैंक में पड़ा रह गया,
वह व्यर्थ ही कमाया हुआ धन है।

  • औलाद योग्य है → उसे कुछ छोड़ने की जरूरत नहीं
  • औलाद नालायक है → कितना भी छोड़ दो, सब नष्ट कर देगी

अंतिम सत्य

मैं, मेरा, तेरा और सारा धन यहीं का यहीं रह जाएगा।
साथ यदि कुछ जाएगा तो केवल—

👉 नेकियाँ
👉 सत्कर्म

इसलिए जीवन में जितना हो सके
नेकी करो, सत्कर्म करो।

📖 श्रीमद्भगवद्गीता का सार


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