तुलसी माता की सेवा – अत्यंत पुण्यकारी नियम
प्रथम सेवा →
तुलसी की जड़ों में प्रतिदिन जल अर्पण करते रहें,
👉 केवल एकादशी के दिन जल न दें।
द्वितीय सेवा →
तुलसी की मंजरियों को समय-समय पर तोड़ते रहना चाहिए,
क्योंकि ये मंजरियाँ तुलसी माता को बीमार कर देती हैं और धीरे-धीरे उन्हें सुखा देती हैं।
जब तक ये मंजरियाँ तुलसी माता के शीर्ष पर रहती हैं,
तब तक तुलसी माता घोर कष्ट सहन करती हैं।
👉 इन दोनों सेवाओं को श्री ठाकुर जी की सेवा के समान माना गया है।
महत्वपूर्ण सावधानियाँ
- तुलसी दल तोड़ने से पहले तुलसी माता से आज्ञा अवश्य लें
- सच्चा वैष्णव बिना आज्ञा लिए तुलसी दल को स्पर्श भी नहीं करता
- रविवार और द्वादशी के दिन तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए
- नाखूनों से कभी भी तुलसी दल न तोड़ें
- एकादशी के दिन जल न दें, क्योंकि इस दिन तुलसी महारानी भी
श्री ठाकुर जी के लिए निर्जल व्रत रखती हैं
👉 ऐसा करने से महापाप लगता है
कारण →
तुलसी माता केवल एकादशी और द्वादशी के दिन
श्री ठाकुर जी की आज्ञा से विश्राम और निंद्रा लेती हैं।
अन्य दिनों में वे एक क्षण के लिए भी विश्राम नहीं करतीं
और आठों पहर श्री ठाकुर जी की सेवा में लगी रहती हैं।
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे
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