📞 💬

गुरुवार, 4 जनवरी 2018

मृत्यु का अर्थ “मरना” नही है पर “माधव से मिलना है” |



जिस प्रकार विवाह के समय कन्या को उसका प्रियतम पति लेने आता है,
उसी प्रकार जो जीव सम्पूर्ण जीवन श्रीकृष्ण से प्रेम करता है,
उसके अंत समय में स्वयं श्रीकृष्ण उसे लेने आते हैं।

विवाह के समय कन्या को
बारात के ढोल-शहनाई की मधुर ध्वनि सुनाई देती है,
जबकि भक्त जीव को अंत समय में
श्रीकृष्ण की मधुर बाँसुरी की ध्वनि सुनाई देती है।

इसीलिए मृत्यु का अर्थ
“मरना” नहीं है, बल्कि “माधव से मिलना” है।

जो जीवन भर कृष्ण को स्मरण करता है,
उसके लिए मृत्यु भय नहीं,
परम मिलन का क्षण बन जाती है।


आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं दोष निवारण हेतु संपर्क करें

Dr Bhargu Astrologer
📞 Contact / WhatsApp: 9920255211



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मानसिक शांति और तनाव कम करने के लिए सरल ज्योतिषीय उपाय

मानसिक शांति और तनाव कम करने के लिए सरल ज्योतिषीय उपाय  क्या मन हमेशा बेचैन रहता है? क्या तनाव, चिंता या नकारात्मक विचार आपका पीछा नहीं छोड़...