माघ मास का महत्व और माघ स्नान की महिमा
भारतीय संवत्सर का ग्यारहवाँ चन्द्रमास और दसवाँ सौरमास माघ कहलाता है।
इस महीने में मघा नक्षत्रयुक्त पूर्णिमा होने से इसका नाम माघ पड़ा।
धार्मिक दृष्टि से इस मास का अत्यंत विशेष महत्व है।
इस मास में शीतल जल में स्नान करने वाला मनुष्य पापमुक्त होकर स्वर्गलोक को प्राप्त करता है।
“माघे निमग्नाः सलिले सुशीते
विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयान्ति।”
पद्मपुराण में माघ मास के माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा गया है कि
भगवान श्रीहरि पूजा से भी उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने माघ मास में केवल स्नान से होते हैं।
इसीलिए समस्त पापों से मुक्ति और भगवान वासुदेव की प्रीति के लिए
प्रत्येक मनुष्य को माघ स्नान अवश्य करना चाहिए।
“प्रीतये वासुदेवस्य सर्वपापानुत्तये।
माघ स्नानं प्रकुर्वीत स्वर्गलाभाय मानवः॥”
माघ मास में दान और व्रत का फल
• माघ पूर्णिमा को ब्रह्मवैवर्त पुराण का दान करने से ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।
• यदि कथा सुनना संभव न हो तो माघ माहात्म्य अवश्य सुनना चाहिए।
• इस मास में स्नान, दान, उपवास और भगवान माधव की पूजा अत्यंत फलदायी होती है।
• माघ अमावस्या को प्रयागराज में स्नान करने से अनंत पुण्य प्राप्त होता है।
• महाभारत में कहा गया है कि माघ मास में तिल दान करने वाला नरक नहीं देखता।
• माघ द्वादशी को दिन-रात उपवास कर भगवान माधव की पूजा करने से
राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
माघ स्नान की कथा (स्कंदपुराण – रेवाखंड)
प्राचीन काल में नर्मदा तट पर शुभव्रत नामक एक ब्राह्मण रहते थे।
वे वेद-शास्त्रों के ज्ञाता थे, किंतु उनका स्वभाव धन संग्रह का था।
वृद्धावस्था में अनेक रोगों से ग्रसित होकर उन्हें बोध हुआ कि
पूरा जीवन धन कमाने में चला गया, अब परलोक सुधारना चाहिए।
उन्हें माघ स्नान की महिमा का श्लोक स्मरण आया और उन्होंने
माघ स्नान का संकल्प लिया।
नौ दिनों तक प्रातः नर्मदा में स्नान किया और
दसवें दिन स्नान के पश्चात उन्होंने शरीर त्याग दिया।
यद्यपि जीवन भर उन्होंने कोई विशेष पुण्य नहीं किया था,
परंतु माघ मास में स्नान और पश्चाताप से उनका मन निर्मल हो गया
और उन्हें स्वर्गलोक की प्राप्ति हुई।
श्री हरि आपका दिन मंगलमय करें। 🌼
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