इष्टसिद्धि में माँ गायत्री का विशेष महत्व
📞 Contact / WhatsApp: 9920255211
इष्टसिद्धि में माँ गायत्री का ध्यान अत्यंत शुभ माना गया है। गायत्री उपासना के लिए गायत्री मंत्र को अत्यंत चमत्कारी और शक्तिशाली बताया गया है।
शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 महाशक्तियों के प्रतीक हैं। केवल एक गायत्री महामंत्र से ही इन सभी देवशक्तियों का स्मरण हो जाता है।
गायत्री ही वह दिव्य शक्ति है जो सृष्टि की रचना, पालन और संहार का कारण है। वेदों में माँ गायत्री को प्राण, आयु, तेज, बल, कीर्ति और धन प्रदान करने वाली बताया गया है।
गायत्री मंत्र शरीर और मन की सुप्त शक्तियों को जाग्रत करता है।
👉 इष्टसिद्धि और मनोवांछित फल प्राप्ति हेतु, गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों से जुड़े अपने इष्ट देवता के विशेष गायत्री मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
24 विशेष गायत्री मंत्र एवं उनके फल
1️⃣ श्री गणेश
बुद्धि, बाधा निवारण, सफलता
॥ ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो बुद्धिः प्रचोदयात् ॥
2️⃣ नृसिंह
भय नाश, शत्रु विजय
॥ ॐ नृसिंहाय विद्महे, वज्रनखाय धीमहि। तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ॥
3️⃣ विष्णु
सबलता, संरक्षण
॥ ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥
4️⃣ शिव
अमंगल नाश, कर्तव्य शक्ति
॥ ॐ पञ्चवक्त्राय विद्महे, महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
5️⃣ कृष्ण
निष्काम कर्म, आकर्षण
॥ ॐ देवकीनन्दाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
6️⃣ राधा
प्रेम, करुणा
॥ ॐ वृषभानुजायै विद्महे, कृष्णप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात् ॥
7️⃣ लक्ष्मी
धन, यश, ऐश्वर्य
॥ ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे, विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॥
8️⃣ अग्नि
तेज, प्रभाव
॥ ॐ महाज्वालाय विद्महे, अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्निः प्रचोदयात् ॥
9️⃣ इन्द्र
रक्षा, रोग नाश
॥ ॐ सहस्त्रनेत्राय विद्महे, वज्रहस्ताय धीमहि। तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात् ॥
🔟 सरस्वती
बुद्धि, विद्या
॥ ॐ सरस्वत्यै विद्महे, ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥
1️⃣1️⃣ दुर्गा
विघ्न नाश, शत्रु संहार
॥ ॐ गिरिजायै विद्महे, शिवप्रियायै धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ॥
1️⃣2️⃣ हनुमान
बल, साहस, निडरता
॥ ॐ अञ्जनीसुताय विद्महे, वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो मारुतिः प्रचोदयात् ॥
1️⃣3️⃣ पृथ्वी
धैर्य, क्षमा
॥ ॐ पृथ्वीदेव्यै विद्महे, सहस्त्रमूर्त्यै धीमहि। तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात् ॥
1️⃣4️⃣ सूर्य
आरोग्य, उन्नति
॥ ॐ भास्कराय विद्महे, दिवाकराय धीमहि। तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥
1️⃣5️⃣ राम
मर्यादा, धर्म
॥ ॐ दाशरथये विद्महे, सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥
1️⃣6️⃣ सीता
पवित्रता, मधुरता
॥ ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे, भूमिजायै धीमहि। तन्नो सीता प्रचोदयात् ॥
1️⃣7️⃣ चन्द्र
मानसिक शांति
॥ ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे, अमृततत्त्वाय धीमहि। तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात् ॥
1️⃣8️⃣ यम
भय नाश, अनुशासन
॥ ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे, महाकालाय धीमहि। तन्नो यमः प्रचोदयात् ॥
1️⃣9️⃣ ब्रह्मा
सृजन शक्ति
॥ ॐ चतुर्मुखाय विद्महे, हंसारूढाय धीमहि। तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ॥
2️⃣0️⃣ वरुण
करुणा, सौम्यता
॥ ॐ जलबिम्बाय विद्महे, नीलपुरुषाय धीमहि। तन्नो वरुणः प्रचोदयात् ॥
2️⃣1️⃣ नारायण
प्रेरणा, चरित्र
॥ ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो नारायणः प्रचोदयात् ॥
2️⃣2️⃣ हयग्रीव
बुद्धि, साहस
॥ ॐ वाणीश्वराय विद्महे, हयग्रीवाय धीमहि। तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात् ॥
2️⃣3️⃣ हंस
विवेक, संतोष
॥ ॐ परमहंसाय विद्महे, महाहंसाय धीमहि। तन्नो हंसः प्रचोदयात् ॥
2️⃣4️⃣ तुलसी
परोपकार, दाम्पत्य सुख
॥ ॐ श्री तुलस्यै विद्महे, विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ॥
एक गायत्री महामंत्र के माध्यम से 24 देव शक्तियाँ जाग्रत होती हैं और साधक को आत्मिक व भौतिक सिद्धि प्रदान करती हैं।
जय माँ भुवनेश्वरी 🙏
आध्यात्मिक मार्गदर्शन हेतु संपर्क करें
Dr. Bhargu Astrologer
📞 Contact / WhatsApp: 9920255211
दोष निवारण, पूजा-विधि, मंत्र साधना और इष्टसिद्धि संबंधी मार्गदर्शन हेतु संपर्क करें।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें