मंत्र
गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित्॥
(पद्म पुराण पृ. 61।31–33)
अर्थ :
गणपति, विघ्नराज, लम्बतुण्ड, गजानन, द्वैमातुर, हेरम्ब, एकदंत, गणाधिप, विनायक, चारुकर्ण, पशुपाल और भवात्मज — ये श्री गणेश जी के 12 पावन नाम हैं।
जो व्यक्ति प्रातःकाल उठकर इन नामों का पाठ करता है, उसका संपूर्ण विश्व उसके वश में हो जाता है और उसे कभी भी किसी प्रकार के विघ्न का सामना नहीं करना पड़ता।
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