जो तुम अच्छा करोगे, वही लौटकर तुम्हारे पास आएगा
आध्यात्मिक एवं जीवन मार्गदर्शन
Dr. Bhargu Astrologer
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एक औरत रोज़ अपने परिवार के लिए भोजन पकाती थी।
हर दिन वह एक अतिरिक्त रोटी उस व्यक्ति के लिए बनाती थी,
जो भी भूखा उसके घर के सामने से गुजरता।
वह रोटी वह खिड़की के सहारे रख देती,
जिसे कोई भी ज़रूरतमंद उठा सकता था।
रोज़ एक कुबड़ा व्यक्ति आता,
वह रोटी उठाता
और बिना धन्यवाद दिए
चलते-चलते बड़बड़ाता—
“जो तुम बुरा करोगे, वह तुम्हारे साथ रहेगा
और जो तुम अच्छा करोगे, वह तुम तक लौटकर आएगा।”
दिन गुजरते गए…
यह सिलसिला चलता रहा।
मन में जन्मा क्रोध
धीरे-धीरे वह औरत उस व्यक्ति से
चिढ़ने लगी।
वह सोचती—
“अजीब आदमी है…
धन्यवाद तक नहीं कहता
और न जाने क्या-क्या बड़बड़ाता रहता है।”
एक दिन क्रोध में उसने मन ही मन कहा—
“आज मैं इस कुबड़े से हमेशा के लिए छुटकारा पा लूँगी।”
उसने उस रोटी में ज़हर मिला दिया।
जैसे ही वह रोटी खिड़की पर रखने लगी,
उसके हाथ काँपने लगे।
वह रुक गई और बोली—
“हे भगवान… मैं यह क्या करने जा रही हूँ?”
तुरंत उसने वह रोटी
आग में जला दी,
नई रोटी बनाई
और खिड़की पर रख दी।
वही रोज़ की तरह…
कुबड़ा आया,
रोटी ली
और वही शब्द दोहराते हुए चला गया—
“जो तुम बुरा करोगे, वह तुम्हारे साथ रहेगा
और जो तुम अच्छा करोगे, वह तुम तक लौटकर आएगा।”
वह यह नहीं जानता था
कि उस औरत के मन में क्या चल रहा था।
माँ की प्रार्थना
उस औरत का एक बेटा था,
जो अपने भविष्य के लिए
दूर किसी शहर गया हुआ था।
महीनों से उसकी कोई खबर नहीं थी।
हर दिन वह माँ
खिड़की पर रोटी रखते समय
भगवान से प्रार्थना करती—
“मेरे बेटे की रक्षा करना,
उसे स्वस्थ रखना
और सुरक्षित घर वापस भेज देना।”
चमत्कार
उसी शाम
दरवाज़े पर दस्तक हुई।
दरवाज़ा खोला
तो माँ स्तब्ध रह गई।
उसका बेटा सामने खड़ा था—
दुबला-पतला,
फटे कपड़ों में,
भूख से कमज़ोर।
बेटे ने कहा—
“माँ… आज मैं मर ही जाता।”
“घर से एक मील पहले भूख से गिर पड़ा था।”
“तभी एक कुबड़ा आदमी आया…”
उसने आगे बताया—
“उसने मुझे उठाया
और अपनी रोटी मुझे देते हुए कहा—
‘मैं रोज़ यही खाता हूँ,
लेकिन आज इसकी ज़्यादा ज़रूरत तुम्हें है।’”
सच का एहसास
माँ का चेहरा पीला पड़ गया।
वह दरवाज़े का सहारा लेकर खड़ी रह गई।
उसे याद आया—
आज सुबह ज़हर वाली रोटी…
अगर वह न जलाई होती…
तो वही रोटी उसके बेटे की मौत बन जाती।
उसी क्षण
उन शब्दों का अर्थ
पूरी तरह समझ में आ गया—
“जो तुम बुरा करोगे, वह तुम्हारे साथ रहेगा
और जो तुम अच्छा करोगे, वह तुम तक लौटकर आएगा।”
निष्कर्ष
🌼 हमेशा अच्छा करो।
🌼 अच्छा करने से कभी मत रुको।
🌼 चाहे उस समय सराहना मिले या न मिले।
क्योंकि—
अच्छाई कभी व्यर्थ नहीं जाती,
वह किसी न किसी रूप में
लौटकर ज़रूर आती है।
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