जन्माष्टमी व्रत एवं पूजन विधि (शास्त्रानुसार)
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व्रत के दिन प्रातःकाल व्रती को सर्वप्रथम सूर्य, सोम (चंद्र), यम, काल, दोनों संध्याएँ (प्रातः एवं सायं), पंचमहाभूत, दिन, रात्रि, पवन, दिक्पाल, भूमि, आकाश, दिशाओं के निवासी तथा समस्त देवताओं का आह्वान करना चाहिए, जिससे वे साक्षी रूप में उपस्थित रहें।
इसके बाद हाथ में जल से भरा ताम्र पात्र लें, जिसमें फल, पुष्प और अक्षत डालें। मास और तिथि का उच्चारण करते हुए निम्न संकल्प करें—
“मैं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत अपने समस्त पापों के नाश तथा अभीष्ट फल की प्राप्ति के लिए कर रहा/रही हूँ।”
संकल्प के पश्चात वासुदेव भगवान को संबोधित करते हुए चार मंत्रों का पाठ करें और जल को भूमि पर छोड़ दें।
सूतिका गृह (प्रसूति गृह) की स्थापना
देवकी माता के पुत्र जन्म के निमित्त प्रसूति गृह (सूतिका गृह) का निर्माण करें। इसमें—
- जल से भरे शुभ पात्र
- आम्र दल (आम के पत्ते)
- पुष्प मालाएँ
- धूप-दीप
- शुभ वस्तुओं से अलंकरण
करें तथा षष्ठी देवी की स्थापना करें।
घर अथवा दीवारों पर देवताओं, गंधर्वों के चित्र तथा स्वस्तिक, ॐ आदि मांगलिक चिह्न बनाएं।
भविष्य पुराण के अनुसार मध्याह्न में स्नान कर छोटा सा सूतिका गृह बनाकर उसे वनमाला, पद्मराग मणि आदि से सजाएं तथा द्वार पर रक्षा हेतु खड्ग, कृष्ण छाग, मूसल आदि के प्रतीक रखें।
बाल गोपाल की स्थापना एवं पूजन
एक पालने या झूले में भगवान श्रीकृष्ण की बाल गोपाल मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
पूर्ण भक्तिभाव से निम्न वस्तुओं द्वारा पूजन करें—
- पुष्प
- धूप-दीप
- अक्षत
- नारियल
- सुपारी
- ककड़ी, नारंगी
- विभिन्न ऋतु फल
अर्धरात्रि जन्मोत्सव
शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी की अर्धरात्रि में हुआ था।
अतः रात्रि के समय—
- भगवान का जन्मोत्सव करें
- आरती उतारें
- प्रसाद वितरण करें
पारण विधि
- नवमी तिथि को ब्राह्मण भोजन कराएं
- यथाशक्ति दक्षिणा देकर विदा करें
- उसी दिन व्रत का पारण करें
जन्माष्टमी पूजन मंत्र
मूल मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”
👉 इस मंत्र का जप दिनभर करते रहें।
ध्यान मंत्र
“योगेश्वराय योगसम्भवाय योगपतये गोविन्दाय नमो नमः”
👉 इस मंत्र से श्रीहरि का ध्यान करें।
स्नान मंत्र
“यज्ञेश्वराय यज्ञसम्भवाय यज्ञपतये गोविन्दाय नमो नमः”
👉 इससे बालकृष्ण का अभिषेक करें।
धूप-दीप अर्पण मंत्र
“विश्वाय विश्वेश्वराय विश्वसम्भवाय विश्वपतये गोविन्दाय नमो नमः”
नैवेद्य अर्पण मंत्र
“धर्मेश्वराय धर्मपतये धर्मसम्भवाय गोविन्दाय नमो नमः”
जन्माष्टमी व्रत का फल
भविष्य पुराण के अनुसार—
- जन्माष्टमी व्रत से समस्त पापों का नाश होता है
- सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं
- भक्त को भक्ति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है
जय श्रीकृष्ण 🙏
नंदलाल की जय, गोपाल की जय
Dr. Bhargu Astrologer
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