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शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

हिन्दू धर्म में शिवलिंग और शालिग्राम का आध्यात्मिक रहस्य



हिन्दू धर्म में शिवलिंग और शालिग्राम का आध्यात्मिक रहस्य

हिन्दू धर्म के तीन प्रमुख देवता माने गए हैं — ब्रह्मा, विष्णु और महेश। साधारण मानव ने इन तीनों को प्रकृति के तत्वों में खोजने का प्रयास किया है। साकार उपासना के लिए मनुष्य ने—

  • भगवान ब्रह्मा को शंख के रूप में
  • भगवान शिव को शिवलिंग के रूप में
  • भगवान विष्णु को शालिग्राम के रूप में

सर्वोत्तम माना है।

शंख, शिवलिंग और शालिग्राम

शंख को सूर्य और चंद्र के समान देवस्वरूप माना गया है। इसके मध्य में वरुण, पृष्ठ में ब्रह्मा तथा अग्र भाग में गंगा और सरस्वती का वास माना गया है।

वहीं शिवलिंग और शालिग्राम को भगवान का विग्रह स्वरूप माना गया है। पुराणों के अनुसार भगवान की पूजा उनके विग्रह रूप में ही की जानी चाहिए।

  • शिवलिंग — भगवान शंकर का प्रतीक
  • शालिग्राम — भगवान विष्णु का प्रतीक

भारत में शिवलिंग के हजारों मंदिर हैं, लेकिन शालिग्राम का केवल एक प्रमुख मंदिर है।


शालिग्राम का मंदिर

शालिग्राम का प्रसिद्ध मंदिर मुक्तिनाथ (नेपाल) में स्थित है। यह वैष्णव संप्रदाय का अत्यंत पवित्र तीर्थ है।
माना जाता है कि मुक्तिनाथ दर्शन से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

मुक्तिनाथ यात्रा कठिन मानी जाती है। काठमांडु से पोखरा, फिर जोमसोम होकर मुक्तिनाथ पहुँचा जाता है। यहाँ सड़क, बस, फ्लाइट और हेलिकॉप्टर — सभी माध्यम उपलब्ध हैं।


शालिग्राम क्या है?

शालिग्राम अत्यंत दुर्लभ होता है और अधिकतर काली गण्डकी नदी के तट पर पाया जाता है।
इसके रंग — काला, भूरा, सफेद, नीला या ज्योतियुक्त — हो सकते हैं।

पूर्ण शालिग्राम पर भगवान विष्णु के चक्र का चिन्ह अंकित होता है।


शालिग्राम के प्रकार

शालिग्राम विष्णु के अवतारों के अनुसार पाए जाते हैं:

  • गोल शालिग्राम — गोपाल रूप
  • मछली आकार — मत्स्य अवतार
  • कछुआ आकार — कूर्म/कच्छप अवतार

कुल लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम माने गए हैं, जिनमें से 24 प्रकार विष्णु के 24 अवतारों और 24 एकादशी व्रतों से संबंधित माने जाते हैं।


शालिग्राम की पूजा विधि

  • घर में एक ही शालिग्राम की पूजा करें
  • मूर्ति पूजा से भी श्रेष्ठ मानी गई है शालिग्राम पूजा
  • शालिग्राम पर चंदन लगाकर तुलसी दल अर्पित करें
  • प्रतिदिन पंचामृत स्नान कराएं
  • जिस घर में शालिग्राम पूजन होता है, वहाँ माँ लक्ष्मी का वास रहता है
  • शालिग्राम पूजन से पूर्व और पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं
  • पूजन में सात्विकता और शुद्ध आचार-विचार अनिवार्य है

शिवलिंग का महत्व

शिवलिंग भगवान शिव का प्रतीक है और जलाधारी माता पार्वती का।
भगवान शिव को निराकार रूप में शिवलिंग के माध्यम से पूजा जाता है।

पंचाक्षरी मंत्र

ॐ नमः शिवाय
इस मंत्र के जप के साथ शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।
महामृत्युंजय मंत्र और शिव स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत फलदायी है।


शिवलिंग पूजा के नियम

  • पंचामृत से स्नान कराकर भस्म का त्रिपुंड तिलक लगाएं
  • शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं (जलाधारी पर चढ़ा सकते हैं)
  • जल, दूध, काले तिल और बेलपत्र अर्पित करें
  • केवड़ा और चम्पा न चढ़ाएं
  • कनेर, धतूरा, आक, चमेली, जूही चढ़ा सकते हैं
  • शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण न करें
  • शिव मंदिर की आधी परिक्रमा ही करें
  • शिवलिंग पूजन से पहले पार्वती पूजन आवश्यक है

शिवलिंग का आध्यात्मिक अर्थ

शिवलिंग को नाद और बिंदु का प्रतीक माना गया है।
पुराणों में इसे —

  • ज्योति स्तंभ
  • ऊर्जा स्तंभ
  • ब्रह्मांडीय स्तंभ

कहा गया है।

शिव का अर्थ — परम कल्याणकारी
लिंग का अर्थ — सृजन की ज्योति


अरुणाचल और ज्योतिर्लिंग

अरुणाचल वह स्थान है जहाँ भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु को अपने परब्रह्म स्वरूप का दर्शन कराया। वहीं से लिंग पूजा की परंपरा प्रारंभ हुई।

इतिहास के अनुसार प्राचीन काल में उल्कापात को रुद्र का प्राकट्य माना गया, और जहाँ-जहाँ ये पिंड गिरे, वहाँ शिव मंदिरों का निर्माण हुआ।
इन्हीं में से 108 ज्योतिर्लिंग प्रमुख माने जाते हैं।


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