अंगारक योग क्या है?
जब कुंडली में मंगल ग्रह का संबंध राहु या केतु के साथ युति अथवा दृष्टि से बन जाता है, तब उस कुंडली में अंगारक योग का निर्माण होता है।
अंगारक योग के अशुभ फल तभी मिलते हैं, जब मंगल और राहु/केतु दोनों अशुभ स्थानों में स्थित हों।
यदि मंगल या राहु-केतु में से कोई एक शुभ स्थान में हो, तो इस योग का नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।
👉 लाल किताब में अंगारक योग को “पागल हाथी” या “बिगड़ा शेर” कहा गया है।
प्रभावित जातक
अंगारक योग की पहचान जातक के व्यवहार से की जा सकती है।
इस योग के प्रभाव में:
- जातक अत्यधिक क्रोधी हो जाता है
- निर्णय लेने में असमर्थता महसूस करता है
- फिर भी स्वभाव से न्यायप्रिय और सहयोगी होता है
- कई बार सरकारी पद, प्रशासनिक सेवा या अधिकार वाले पद पर पहुँचता है
अंगारक योग के प्रभाव
अंगारक योग अग्नि तत्व से संबंधित होता है। इसके कारण:
- अत्यधिक क्रोध
- निर्णय में असमंजस
- अग्नि भय, दुर्घटनाएं
- रक्त से जुड़े रोग
- त्वचा (स्किन) संबंधी समस्याएं
हालाँकि यह योग शुभ और अशुभ दोनों फल देता है।
इसके प्रभाव में जातक अपने परिश्रम से धन और नाम कमाता है, लेकिन जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।
अंगारक योग से होने वाले नुकसान
- स्वभाव में आक्रामकता और हिंसा
- भाई-बहनों, मित्रों और संबंधियों से विवाद
- धन की कमी
- दुर्घटनाओं की संभावना
- रोग, मानसिक तनाव
- व्यापार और वैवाहिक जीवन में बाधाएं
- शत्रुओं द्वारा तंत्र-मंत्र या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव
अंगारक योग के उपाय
- मंगलवार का व्रत रखें
- भगवान शिव के पुत्र कुमार कार्तिकेय की आराधना करें
- हनुमान जी की नियमित पूजा करें (उत्तम उपाय)
- राहु बीज मंत्र का जप करें
- मंगल और राहु की शांति हेतु निर्दिष्ट दान करें
- आवारा कुत्तों को मीठी रोटी खिलाएं
- राहु शांति के लिए घर पर पूजा कराएं
- चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में देवी लक्ष्मी की पूजा करें
- ध्यान (Meditation) करें और विवादों से दूर रहें
- सत्संग कराएं और गुरु को घर बुलाएं
- किसी धार्मिक स्थल पर जाकर पूजा-अर्चना करें
- चांदी का पेंडेंट धारण करें
- प्रतिदिन शाम को दीपक जलाएं
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Dr. Bhargu Astrologer
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