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मंगलवार, 2 जनवरी 2018

स्नान कब ओर केसे करे घर की समृद्धि बढाना हमारे हाथ मे है सुबह के स्नान को धर्म शास्त्र में चार उपनाम दिए है।



स्नान के चार प्रकार और उनका प्रभाव

1. मुनि स्नान
सुबह 4:00 से 5:00 बजे के बीच किया जाता है।

2. देव स्नान
सुबह 5:00 से 6:00 बजे के बीच किया जाता है।

3. मानव स्नान
सुबह 6:00 से 8:00 बजे के बीच किया जाता है।

4. राक्षसी स्नान
सुबह 8:00 बजे के बाद किया जाता है।


शास्त्रों के अनुसार महत्व

मुनि स्नान – सर्वोत्तम
देव स्नान – उत्तम
मानव स्नान – सामान्य
राक्षसी स्नान – धर्म में निषेध

👉 किसी भी मनुष्य को सुबह 8 बजे के बाद स्नान नहीं करना चाहिए।


स्नान के लाभ

मुनि स्नान

घर में सुख, शांति, समृद्धि, विद्या, बल, आरोग्य और चेतना प्रदान करता है।

देव स्नान

जीवन में यश, कीर्ति, धन-वैभव, सुख, शांति और संतोष देता है।

मानव स्नान

कार्य में सफलता, भाग्य का साथ, अच्छे कर्मों की प्रेरणा, परिवार में एकता और मंगल प्रदान करता है।

राक्षसी स्नान

दरिद्रता, हानि, कलह, धन-नाश और मानसिक परेशानी का कारण बनता है।


पुरानी परंपरा का महत्व

इसी कारण पुराने समय में लोग सूर्योदय से पहले स्नान करते थे।
विशेष रूप से घर की स्त्रियाँ — चाहे वह माँ, पत्नी या बहन हों।

घर के बड़े-बुज़ुर्ग समझाते थे कि
👉 सूरज निकलने से पहले स्नान हो जाना चाहिए

ऐसा करने से धन, वैभव और माँ लक्ष्मी का वास घर में बना रहता है।


आज की स्थिति

पहले एक व्यक्ति की कमाई से पूरा परिवार सुखी रहता था।
आज चार लोग कमाने पर भी घर पूरा नहीं चल पाता

इसका कारण हम स्वयं हैं —
हमने पुराने नियम तोड़कर अपनी सुविधा के अनुसार नए नियम बना लिए।


प्रकृति का नियम

प्रकृति का नियम स्पष्ट है—
जो उसके नियमों का पालन नहीं करता, उसे दुष्परिणाम अवश्य भोगना पड़ता है।

इसलिए जीवन में
✔ कुछ अच्छे नियम अपनाइए
✔ उनका नियमित पालन कीजिए

ताकि
👉 आपका भी भला हो
👉 आपके अपनों का भी भला हो

मनुष्य जन्म बार-बार नहीं मिलता।
अपने जीवन को सुखमय और धर्ममय बनाइए।


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