दो पक्ष-
1.कृष्ण पक्ष
2.शुक्ल पक्ष
तीन ऋण -
1.देव ऋण
2.पितृ ऋण
3.ऋषि ऋण
चार युग -
1.सतयुग
2.त्रेतायुग
3.द्वापरयुग
4.कलियुग
चार धाम -
1.द्वारिका
2.बद्रीनाथ
3.जगन्नाथ पुरी
4.रामेश्वरम धाम
चारपीठ -
1.शारदा पीठ ( द्वारिका )
2.ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
3.गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी )
4.शृंगेरीपीठ
चार वेद-
1.ऋग्वेद
2.अथर्वेद
3.यजुर्वेद
4.सामवेद
चार आश्रम -
1.ब्रह्मचर्य
2.गृहस्थ
3.वानप्रस्थ
4.संन्यास
चार अंतःकरण -
1.मन
2.बुद्धि
3.चित्त
4.अहंकार
पञ्च गव्य -
1.गाय का घी
2.दूध
3.दही
4.गोमूत्र
5.गोबर
पंच तत्त्व -
1.पृथ्वी
2.जल
3.अग्नि
4.वायु
5.आकाश
छह दर्शन -
1.वैशेषिक
2.न्याय
3.सांख्य
4.योग
5.पूर्व मिसांसा
6.दक्षिण मिसांसा
सप्त ऋषि -
1.विश्वामित्र
2.जमदाग्नि
3.भरद्वाज
4.गौतम
5.अत्री
6.वशिष्ठ और कश्यप
सप्त पुरी -
1.अयोध्या पुरी
2.मथुरा पुरी
3.माया पुरी ( हरिद्वार )
4.काशी
5.कांची ( शिन कांची - विष्णु कांची )
6.अवंतिका और
7.द्वारिका पुरी
आठ योग -
1.यम
2.नियम
3.आसन
4.प्राणायाम
5.प्रत्याहार
6.धारणा
6.ध्यान
7.समािध !
दस दिशाएं -
1.पूर्व
2.पश्चिम
3.उत्तर
4.दक्षिण
5.ईशान
6.नैऋत्य
7.वायव्य
8.अग्नि
9.आकाश
10.पाताल
बारह मास -
1.चैत्र
2.वैशाख
3.ज्येष्ठ
4.अषाढ
5.श्रावण
6.भाद्रपद
7.अश्विन
8.कार्तिक
9.मार्गशीर्ष
10पौष
11.माघ
12.फागुन
पंद्रह तिथियाँ -
1.प्रतिपदा
2.द्वितीय
3.तृतीय
4.चतुर्थी
5.पंचमी
6.षष्ठी
7.सप्तमी
8.अष्टमी
9.नवमी
10.दशमी
11.एकादशी
12.द्वादशी
13.त्रयोदशी
14.चतुर्दशी
15.पूर्णिमा
16.अमावास्या
स्मृतियां -
1.मनु
2.विष्णु
3.अत्री
4.हारीत
5.याज्ञवल्क्य
6.उशना
7.अंगीरा
8.यम
9.आपस्तम्ब
10.सर्वत
11.कात्यायन
12ब्रहस्पति
13.पराशर
14.व्यास
16.शांख्य
17.लिखित
18.दक्ष
19.शातातप
20.वशिष्ठ
भाइयों और बहनों दोष निवारण के उपाय, पूजा, मंत्र और दूसरी महतवपूर्ण बातों के बारे में आप अधिक जानकारी
Dr Joshi Astrologer +91 7977021713
से मिलकर प्राप्त कर सकते है ।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें