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मंगलवार, 2 जनवरी 2018

कष्ट निवारण उपाय



प्रतिदिन समय निकालकर अवश्य पढ़ें

श्रीरामचरितमानस – बालकाण्ड

चौपाई
बार बार करि बिनय बड़ाई। रघुपति चले संग सब भाई॥
जनक गहे कौसिक पद जाई। चरन रेनु सिर नयनन्ह लाई॥1॥

भावार्थ :
जनकजी की बार-बार की गई विनती और स्तुति स्वीकार कर श्री रघुनाथजी सभी भाइयों के साथ चले। जनकजी ने जाकर मुनि विश्वामित्र के चरण पकड़ लिए और उनके चरणों की रज सिर और नेत्रों में धारण की॥1॥

सुनु मुनीस बर दरसन तोरें। अगमु न कछु प्रतीति मन मोरें॥
जो सुखु सुजसु लोकपति चहहीं। करत मनोरथ सकुचत अहहीं॥2॥

भावार्थ :
हे मुनिवर! आपके उत्तम दर्शन से कुछ भी दुर्लभ नहीं है, ऐसा मेरे मन का दृढ़ विश्वास है। जो सुख और सुयश स्वयं लोकपाल भी चाहते हैं, पर असंभव समझकर जिसकी कामना करने में संकोच करते हैं॥2॥

सो सुखु सुजसु सुलभ मोहि स्वामी। सब सिधि तव दरसन अनुगामी॥
कीन्हि बिनय पुनि पुनि सिरु नाई। फिरे महीसु आसिषा पाई॥3॥

भावार्थ :
हे स्वामी! वही सुख और सुयश मुझे सहज ही प्राप्त हो गया। आपकी दर्शन-कृपा से सभी सिद्धियाँ स्वतः प्राप्त होती हैं। इस प्रकार बार-बार विनती कर और सिर नवाकर राजा जनक आशीर्वाद पाकर लौटे॥3॥

चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई॥
रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी॥4॥

भावार्थ :
डंका बजाकर बारात चली। छोटे-बड़े सभी हर्षित थे। मार्ग के गाँवों के स्त्री-पुरुष श्रीरामचन्द्रजी के दर्शन कर अपने नेत्रों का फल पाकर आनंदित हो गए॥4॥

दोहा
बीच बीच बर बास करि मग लोगन्ह सुख देत।
अवध समीप पुनीत दिन पहुँची आइ जनेत॥343॥

भावार्थ :
मार्ग में सुंदर विश्राम करते हुए और लोगों को आनंद देते हुए, पवित्र दिन में बारात अयोध्या के समीप पहुँच गई॥343॥

नाम जप
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

🙏 जय माँ भगवती 🙏
❗ आपका हर दिन मंगलमय हो ❗

आध्यात्मिक मार्गदर्शन

Dr. Bhargu Astrologer
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