सकट चौथ व्रत का महत्व, पूजा विधि और मुहूर्त
आध्यात्मिक मार्गदर्शन: Dr. Bhargu Astrologer
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सकट चौथ एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है, जिसे विशेष रूप से विवाहित महिलाएँ अपने पुत्रों की लंबी आयु, सुख और संकटों से रक्षा के लिए मनाती हैं। यह व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इसे तिल चौथ, माही चौथ, वक्रतुंडी चतुर्थी और तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है।
सकट का अर्थ होता है संकट। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीगणेश ने देवताओं के संकटों का निवारण किया था। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया कि इस दिन का व्रत करने से भक्तों के सभी संकट दूर होंगे। तभी से यह पर्व संकट मोचन व्रत के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन विद्या, बुद्धि और संकट हरण करने वाले भगवान श्रीगणेश तथा चंद्रदेव की पूजा की जाती है। यह व्रत दुखों को दूर करने वाला और मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाला माना गया है।
🌼 सकट चौथ का महत्व
सकट चौथ का व्रत भगवान श्रीगणेश के पूजन और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। उत्तर भारत में यह पर्व विशेष श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है।
माताएँ यह व्रत अपने पुत्रों के जीवन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से संतान पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं।
🏛️ सकट माता मंदिर
राजस्थान में एक गाँव है जिसे सकट गाँव कहा जाता है। यहाँ देवी सकट माता का प्राचीन मंदिर स्थित है।
यह मंदिर अलवर से लगभग 60 किमी और जयपुर से लगभग 150 किमी की दूरी पर स्थित है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से सकट चौथ व्रत का विशेष फल प्राप्त होता है।
📅 सकट चौथ 2018 – तिथि और मुहूर्त
वर्ष 2018 में सकट चौथ व्रत:
📌 5 जनवरी 2018, शुक्रवार
🌙 सकट चौथ पूजा एवं चंद्र दर्शन समय
• चंद्रमा उदय का समय: रात्रि 21:23 बजे
• चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 4 जनवरी 2018, गुरुवार – 21:31 बजे
• चतुर्थी तिथि समाप्त: 5 जनवरी 2018, शुक्रवार – 19:00 बजे
इस दिन भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ सकट माता की पूजा का भी विशेष विधान है। चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।
जय श्री गणेश 🙏
जय माता दी 🌺
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